क्या आप बौद्ध धर्म के बारे में जानते है ये अहम् जानकारी ?
नमस्कार दोस्तों ,कैसे है आप ?,
बौद्ध धर्म

जैसा की आप लोग उपरोक्त विषय से समझ गए होंगे की हम आज किस विषय पर आपको जानकारी प्रदान करंगे -:
-: बौद्ध धर्म :-
- बौद्धधर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध का नाम सिद्धार्थ था |
- उनका जन्म ५६३ ई.पू. कपिल वस्तु के तुम्बिनी ग्राम में सशक्त कुल क्षत्रिय वंशीय राजा शुद्धधन के यहाँ हुआ था |
- उनके बचपन में ही उनकी माता महामाया (कोसल राजवश ) का देहांत हो जाने के कारण मौसी गौतमी ने उनका पालन – पोसन किया | बाल्य कल से ही उनका सुझाव आध्यात्मिकता की और था|
- १६ वर्ष की आयु में यशोधरा नामक सुन्दरी से उनका विवाह कर दिया गया | ८ वर्ष उनके पुत्र राहुल का जन्म हुआ | लेकिन इतने पर भी इनका मन दांपत्य जीवन में नहीं रमा |
- सांसारिक दुखों से द्रवित होकर उन्होंने २९ वें वर्ष गृहत्याग दिया, जिसे बौध मतावलंबी महा भिनिस्क्रमण कहते हैं |
- उनके प्रथम गुरुद्वय अलारऔर उद्रक थे |
- सात वर्ष तक भटकने के बाद अन्तः २ वर्ष आयु में गया ( बिहार) में उर्वलानमक सन पर पीपल के वृक्ष के नीचे समाधिस्त अवस्थ में ४९ वे दिन उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और वे महात्मा बुद्ध कहलाये|
- उन्होंने वारणसीले निकट सारनाथ में ओने पाचं ब्राम्हण शिष्यों को पहली बार उपदेश दिया (भाषा पली )यहीं उनहोंने संघ की भाई स्थापना की |
- उनका प्रथम उपदेस धर्म चक्र प्रवर्तन कहलाता हैं |
- उन्होंने सर्वाधिक उपदेस स्रावास्थी (कोशल ) में दिया |
- गौतम बुद्ध का निधन ४८३ ई. पू. ८० वर्ष की आयु में कुलीनगर में हुआ |
- उनका निधन महापरिनिर्वन के नाम से लोकप्रिय हैं |
- निर्वानोपरांत के बुद्ध के अस्थि अवशेस को आठ भागो में विभाजित करके और भारत के अलग – अलग स्थानों पर स्थापित कर के उनके ऊपर आठ स्तूप निर्मित किए गए |
- उन्होंने सांसारिक दुखों के चार कारण बताये :
- जीवन दुखमय हैं |
- तस्था , मोह लालसा, दुःख के कारण हैं |
- इन कारणों को दूर करके दुखों से छुटकारा पाया जा सकता हैं |
- इनके लिए सत्य मार्ग का ज्ञान आवश्यक हैं |
- बुद्ध ने माध्यमप्रतिप्रदा (तथागत मार्ग ) अर्थात माध्यम मार्ग अपनाने की शिक्षा दी, जिनके अनुसार न तो उनके लिये अधिक विलास करना चाहिए और न ही अधिक सयम|
- बुद्ध आत्मा और इश्वरकके अस्तित्व में विश्वास नहीं करते थे | बुद्ध ने संशारिक दुखों के निदान हेतुं क और प्रावधन किया हैं , जिसे प्रतिव्य (किसी वस्तु के होने पर ) समुत्पाद (किसी अन्य वस्यु की उत्पति ) के नाम से जाना जाता हैं | क्षण भंग वाद और नैरात्मव भी इसी बौध दर्शन से सबंधित हैं |
- बौद्ध धर्म में वर्ण व्यवस्थ की निदान की गई हैं |
- बौद्धधर्म पुनरजन्म में विश्वाशकरता था |
- बुद्ध ने कर्म अण्डों और पशु बलि प्रथ का प्रखर विरोध किया था, जो वैदिक कल से चली अया रही थी

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