नौकरी करने वाले हमेशा पैसो के लिये क्यों रोते है Why do working people always cry for money?

नौकरी करने वाले हमेशा पैसो के लिये क्यों रोते है

Why do working people always cry for money?

नमस्कार दोस्तों ,

             कैसे है आप ?, जैसा की आप लोग उपरोक्त विषय से समझ गए  होंगे की हम आज किस विषय

पर आपको जानकारी प्रदान करंगे |

हम यहाँ  उन लोगो  के बारे में जिक्र नहीं कर रहे है जो 60,000 से ऊपर पैसा कमाते है |

पैसा जो की  वह वस्तु है जिसके बिना व्यक्ति एक पल जीवित नहीं रह सकता, क्योकि  बिना पैसे के जींवन

मे कुछ नहीं हो सकता,क्योकि यदि आपके पास पैसा नहीं है तो कोई भी आपको नहीं पूछेगा  चाहे वह आपका

रिस्तेदार ही क्यों न हो पैसे से ही आपको इज्जत मिलती है |

पैसा आपके  बुरे कामो को भी छिपा देता है |   

इसी प्रकार यदि  कोई गरीब व्यक्ति  किसी के घर जाता है तो उसे उसकी औकात के हिसाब से व्यव्हार किया जाता है

 यहाँ तक की उसको सस्ती सी मिठाई खिलाई जाएगी और उसी जगह पर कोई व्यक्ति अमीर है तो उसके लिये

काजू- कतली या और महंगी मिठाई खिलाई जाएगी और सबसे मजे की बात तो यह है कि वह अमीर व्यक्ति उस

व्यक्ति की कोई सहायता  करने वाला नहीं है यदि थोड़ी सी कर भी दी तो उसका इतना प्रचार करेगा  की वह  यही

सोचेगा  की गलत ही सहायता  ले ली |

चलो अब बात कर लेते पैसे का जीवन में क्या रोल है ?

पैसे का जीवन में बहुत ही रोल है क्योकि पैसे के बिना आप कुछ भी नहीं खरीद सकते यहाँ तक – प्यार भी…

 आज कल के लोंगो की झूठी वाह वाही –

“जैसे मेने पैसा तो नहीं कमाया, पर इज्जत बहुत कमाई है |

 जब वह व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होता है तो वहाँ पैसा काम आता है, पैसे से ही बच्चे की फ़ीस, दवा

व घरेलु जरूरते  पूरी होती है |

अत: पैसा जीवन जीने के लिये बहुत जरुरी है, ठीक उसी प्रकार अब हम बात करते है ,

नौकरी करने वाले हमेशा पेसो के लिये रोते है – इस समस्या के  उत्पन्न होने के बहुत से

कारण है,जैसे सीमित आमदनी,बचत की कमी ,निश्चित वेतन, जीवन शैली की बढ़ती हुई

जरूरते, ऊपरी दिखावा तथा खुद को अमीर दिखना ये सब चीजे एक नौकरीपेसा व्यक्ति के

लिये समस्या उत्पन्न करते है |

सीमित आमदनी –

सीमित आमदनी – आज के दौर में हर नौकरी करने वाला एक सीमित आमदनी ही प्राप्त करता है, और

यदि वह 10,000 रुपये से 60,000 रुपये के बीच में वेतन प्राप्त करता है, तो वह एक सीमित दायरे में

ही आएगा, क्योकि इसमें वेतन की जो वृद्धि होती है, वह महंगाई और खर्चे की तुलना में काफी कम होती है |

आप इसे यह भी कह सकती है की आमदनी कम खर्चा अधिक –

महंगाई – inflation

महंगाई – inflation- दोस्तों इस शब्द से कोई भी अपरचित नहीं है क्योकि महंगाई ने व्यक्ति

का ऐसा बुरा हाल किया है | जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते आज कल दैनिक जीवन में प्रयोग

होने वाली हर छोटी – से छोटी व बड़ी से बड़ी वस्तु के दाम आसमान छू रहे है|

इसी प्रकार इसका वैज्ञानिक और आर्थिक कारण – “मांग और आपूर्ति का असंतुलन है,

जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओ की मांग उनकी कुल आपूर्ति से अधिक हो जाती है,

तो कीमते बढ़ती है, इसी प्रकार उत्पादन लागत में वृद्धि,

(जैसे – कच्चा, माल) ईंधन और बाजार में पैसे की अधिकता भी

महंगाई को बढ़ावा देती है |”

कर्ज -:

कर्ज – दोस्तों कर्ज शब्द से भी कोई अपरचित नहीं है, यह वह जाल है जिसमे एक बार कोई

व्यक्ति फसता है, तो जल्द बाहर नहीं आ पाता उसका पूरा जीवन कर्ज में ही रहता है |

 आपने पुरानी फिल्मो में भी देखा होगा की  कैसे कोई व्यक्ति कर्ज लेकर ब्याज पर ब्याज दे-दे

कर खुद का जीवन नष्ट  कर लेता है | आज के समय मे भी कर्ज ने नया रूप ले लिया है,

जिसे लोग लोन (पर्सनल लोन,होम लोन,एजुकेशन लोन) और न जाने कितने प्रकार के लोन, 

बैंक व प्राइवेट कंपनिया तथा फर्जी एप्लीकेशन लोन प्रदान कर रही है |

जिस को लेकर व्यक्ति  खुद का जीवन अन्धकारमय कर लेता है, और आसान किस्तों

का नाम देकर व्यक्ति को लूटा जाता है, जिसे लोग प्रायः यह समझते है, की EMI दे कर

लोन चुका देंगे, परन्तु ऐसा हो नहीं पाता है |

व्यक्ति एक लोन लेता है, तो उसको समय पर नहीं भर पाता है तो उसे भरने के लिये दूसरा

लोन ले लेता अतार्थ अपनी जिन्दगी तहस- नहस कर लेता है, यदि व्यक्ति ने नए लोन का

पैसा सही जगह लगाया है, तब तो थोडा सही है परन्तु 90 प्रतिशत लोग यही नहीं पता कर

पर रहे होते है  की लोन का पैसा गया कहा ? तो यह चिंता उसको अन्दर ही अन्दर परेशान करती

रहती है |

क्रेडिट कार्ड – Credit Card 

क्रेडिट कार्ड – यह एक कर्ज का आधुनिक रूप है  जो व्यक्ति  को कर्ज के जाल मे ऐसा घुमाता है,

की कभी बाहर निकला ही नहीं पाता है |

हद तो तब हो जाती है जब किसी व्यक्ति की आय 10,000 रूपए है, और उसे 90,000 रूपए 

की लिमिट वाला क्रेडिट  कार्ड क्यों दे दिया जाता है ? जबकि कंपनी वालो को यह पता होता है की कोई व्यक्ति 10,000 रूपए महीने कमा रहा है, और उसके अन्य खर्चे भी है तो उसे 90,000 रूपए  की लिमिट क्यों दे गई है |

अब लोग कहेंगे की उसका प्रयोग आपातकालीन मे किया जा सकता है, इसलिये दिया जाता है |

लेकिन क्रेडिट कार्ड  रखने वाले 90 प्रतिशत लोग इसका प्रयोग विलासितापूरण जीवन जीने के लिये

करते है |उनको क्रेडिट  कार्ड के माध्यम  से पेमेंट करने पर पैसे खर्च होने का कोई अहसास नहीं होता है,

यही अगर उस वस्तु को कैश देकर लिया जाय तो काफी बुरा महसूस होता है, उन्हें कुछ चीजो की जरूरत

भी नहीं होती है, फिर भी वह उन्हें खरीद लेते है |

सोचते  है 40-45 दिन के बाद पैसा देना है, बस यही सोचकर क्रेडिट कार्ड के जाल मे फसे रहते है,

और हर महीने मिनिमम अमाउंट पे कर-कर के अपना कर्ज उतार ही नहीं पाते है |

बढते खर्च व खुद को अमीर दिखने की मानसिक गुलामी -:

बढते खर्च व खुद को अमीर दिखने की मानसिक गुलामी

जैसा की उपरोक्त मे बताया गया की खर्चे दिन पर दिन बढ़ ही रहे  है, क्योकि आजकल हर व्यकित

अच्छी लाइफस्टाइल जीना चाहता है, लेकिन वह भूल जाता है की उसकी आमदनी कितनी है उसे

वह हर चीज चाहिये  जो उसके पडोसी,रिश्तेदार तथा मित्रों के पास है,उसे यह ज्ञात नहीं रहता की

वह उनसे बराबरी तो कर रहा है  लेकिन आमदनी मे बहुत बड़ा अंतर है, यहाँ सोचने वाली बात यह

है की व्यक्ति  जरुरत या शौक किस पर पैसा खर्च कर रहा है, तो अधिक मात्रा मे शौक मे ज्यादा पैसा

खर्च किया जा रहा है, जैसे की एक व्यक्ति जिसकी  छोटी सी नौकरी है, और हर महीने 10,000 रूपए 

कमाता है लेकिन उसके शौक 50,000 रूपए    महीने कमाने वाले व्यक्ति  से भी ज्यादा होते है |

व्यक्ति को अपनी इनकम यानि मासिक वेतन से अधिक का फ़ोन नहीं खरीदना चाहिये यदि  आपकी

जरुरत नहीं है तो उसका दूसरा विकल्प भी चुन सकते है  जिससे व्यक्ति अपना काम चला  सकता है

और कर्जे से आजाद रह कर जीवन यापन कर सकता है |

और रही बात दूसरो  को दिखाने की, कि मे कितना अमीर हूँ |

लोगो को लगता है की यदि वह महंगे कपड़े, महंगा फ़ोन, महँगी बाइक, महंगी कार खरीद कर  जो

की भले  ही किस्तों पर ली गयी हो खुद को अमीर साबित करने मे लगा रहता है लेकिन ऐसा होता

नहीं है दोस्त ! और एक बात हमें ध्यान देनी चाहिये यदि आपका कार्य एक साइकिल से हो रहा है,

तो उसका प्रयोग करने मे बिल्कुल शर्म नहीं करनी चाहिये, क्योकि  लोगो का काम है, कहना इसलिये

अपने गोल की तरफ ध्यान  देना चाहिये, और लगातार बिना रुके मेहनत करनी चाहिये क्योकि

बिना मेहनत किये कुछ नहीं मिलता है दोस्त !

वित्तीय  ज्ञान की कमी –

वित्तीय  ज्ञान की कमी –

नौकरी करने वाला व्यक्ति को वित्तीय ज्ञान  उतना नहीं होता है जिसकी वजह से वह पैसे का सही

प्रबंधन नहीं  कर पाता है, इसलिये वह न तो सही जगह निवेश करता है बल्कि वह अन्य चक्करों मे

पड़ जाता है और अपने पैसो की हानि कर बैठता है उसे लगता है इधर-उधर पैसा लगा कर वह अमीर

बन जायेगा पर ऐसा नहीं होता है उल्टा वह गरीब और हो जाता है और ऐसा गरीब की वो किसी को

दीखता भी नहीं है की वह गरीब है पर अन्दर से खोखला हो चुका होता है क्योकि अमीर बनने का कोई

शॉर्टकट नहीं है दोस्त ! इस लिये पैसे को निवेश करने से पहले कई बार सोचे तभी आप इन कर्जो से

मुक्ति पा सकते है |

स्तिथि सुधारने के उपाय –

स्तिथि सुधारने के उपाय –

यह बहुत बड़ी बात है की व्यक्ति  को स्थिति सुधारने का भी मौका मिलना चाहिये  यहाँ पर

कुछ उपाय बताये जा रहे  है जिसका  प्रयोग करके  कुछ हद कर्जो से मुक्ति प्राप्त हो सकती  है

और जीवन खुशहाल हो सकता है वर्ना यूँ ही घिस- घिस कर जिन्दगी चलती रहेगी |

जैसे कि अपने कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिये व समय का सही प्रयोग करना साथ ही

साथ बजट  और बचत पर भी  ध्यान देना चाहिये |

सबसे जरुरी बात यह है की कौन सी चीज हमें खरीदनी  है या नहीं इसका निर्णय यदि सही हुआ

तो व्यक्ति काफी हद तक कर्जे से निजात पा  सकता है कोई भी चीज खरीदते समय हमें उसके प्रयोग

पर  ध्यान देना चाहिये की हम उसका प्रयोग करेंगे  जिसे हम खरीदने  जा रहे है या फिर सिर्फ देखा-दूनी

  या हवा-बाजी मे खरीद रहे  है, इसके  साथ सबसे अहम् योगदान इसका भी  है, की कर्ज को कैसे  कम

किया जाय इस पर कार्य करना बहुत जरुरी है, तब जा कर सायद कुछ हद तक लाभ मिल पाये |

“नियमित रूप से अपनी वित्तीय स्तिथि का पुनः मूल्यांकन करना और समय पर निवेश करना ही 

इस समस्या का दीर्घ- कालीन समाधान है |”

आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद यहाँ तक आपने हमारे  ब्लॉग को पढ़ा अगर आपको हमारे  द्वारा दी गयी

  जानकारी अच्छी  लगी हो तो कमेंट मे जरुर बताये तथा अपने मित्रों को शेयर जरुर करे |

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