जाने मजदूरी एवं बोनस के नए नियम

जाने मजदूरी एवं बोनस के नए नियम

नमस्कार दोस्तों ,कैसे है आप ?,

आज बात करते है, मजदूरी एवं बोनस के नए नियम से सम्बंधित प्रमुख जानकारी

मजदूरी का भुगतान अधिनियम , 1936 यह सुनिश्चित करता हैं की भुगतान  समय पर हो और कामगारों की मजदूरी में से किसी

भी प्रकार की अनधिकृत कटौती न की जाये |

अधिनियम की धारा 1 के उप  – बंध( 6) में प्रदत्त शक्तियों का  प्रयोग न्यूनतम मजदूरी अधिनियम , 1948  अधिकतर असंगठित क्षेत्र  के श्रमिकों  के हितो की रक्षा करने

हेतु उद्देश्य से न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 लागु किया जाता था | अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारें अपने – अपने अधिकार क्षेत्र में निर्धारण रोजगारों में कमीशन

को दिया न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण , समीक्षा और उसे लागु करवाने के लिए सक्षम प्रशासन हैं |

इस समय केंद्रीय और राज्य  में क्रमशः 45 और 1697 अनुसूचित रोजगार है | न्यूनतम मजदूरी अधिनियम , 1948 के अनुपालन  को दो स्तरों पर सुनुश्चित किया जाता  हैं |

जंहा  एक और केंद्रीय क्षेत्र में इस अधिनियम का पालन मुख्य श्रम आयुक्त ( केंद्रीय ) के निरिक्षण अधिकारियो  द्वारा कराया जाता हैं | जिन्हें सामान्यतः केंद्रीय

औधोगिक  संबंध मशीनरी ( सीआईआरएम ) के रूप में नामित किया जाता हैं |

वहीँ दूसरी  और राज्यों में इन  इन नियमों का अनुपालन राज्य  मशीनरी द्वारा  करवाया जाता हैं |

न्यूनतम मजदूरी को मुद्रास्फीति  से बचने के लिए केंद्र सरकार ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़े हुए परिवर्तन महंगाई भत्ता  सेना ने  प्रारंभ किया हैं |

जहा तक राज्य सरकारों / केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों की बात हैं , उनमें से 27 ने वीडीए को न्यूनतम मजदूरी  का  एक घटक बना लिया हैं |

केंद्र और राज्य सरकारों दोनों ही समय – समय पर इन अनुसूचित रोजगारों के लिए दिया न्यूनतम मजदूरी में संशोधन करती रहती हैं |

पुरे देश में एक  समान न्यूनतम मजदूरी ढांचा तैयार करने एवं न्यूनतम मजदूरी में असमानता को काम करने के लिए 1991 में राष्ट्रीय

ग्रामीण श्रमिक आयोग ( एनसीआरएल ) की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय समान स्तरीय न्यूनतम मजदूरी में ( NFLMW) की  अवधारण भी प्रस्तुत  की  गई  थी |

राष्ट्रीय समान स्तरीय न्यूनतम मजदूरी में समय – समय पर संशोधन किया जाता रहा हैं | केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में NFLMW को 137 रूपये प्रतिदिन से बढ़ाकर

160 रूपये प्रतिदिन किया हैं | तथापि यह ध्यान में रखा जाना चाहिए की राष्ट्रीय समान स्तरीय न्यूनतम मजदूरी एक गैर – संबैधानिक उपाय हैं |

 

मजदूरी का भुगतान 

मजदूरी का भुगतान  अधिनियम , 1936 यह सुनिश्चित करता हैं की भुगतान समय पर हो और कामगारों की मजदूरी में से किसी

भी प्रकार की अनधिकृत कटौती न जाए | अधिनियम की धारा 1 के उप – बंध (6) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग  केंद्र  हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय

प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय  द्वारा प्रकाशित उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के आकड़ों को आधार मानते हुए वर्ष 2012 से मजदूरी की सीमा 10,000 रूपये

प्रतिमाह से बढ़ाकर 18,000 रूपये प्रतिमाह कर दी हैं | मजदूरी का भुगतान ( संशोधन ) अधिनियम ,2017

: मजदूरी का भुगता नकद अथवा चेक से या फिर कर्मचारी के बैंक कहते में सीधे भेजने के लिए मजदूरी का भुगतान अधिनियम ,

1936 की धरा 6 में 2017 में संशोधन किया गया |  संशोधन के द्वारा यहाँ भी व्यवस्था की गई हैं की सक्षम सरकार सरकारी राजपत्र  ( गजट ) में अधिघोषणा कर सकती हैं |

की किसी भी उधोग या उपक्रम में नियोक्ताओं में से कौन अपने  यहाँ कार्यरत  कर्मचारी के वेतन का भुगतान चेक द्वारा  अथवा बैंक खाते में जमा करने के लिए अधिकृत होगा | 

बोनस का भुगतान 

बोनस का भुगतान  अधिनियम ,1965 में संशोधन किया गया हैं | अब इसकी धारा 2 ( 13) के अंतर्गत पात्रता की योग्यता सीमा को 10, 000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर  21000 रूपये

प्रतिमाह करने और धारा12 के अंतर्गत गड़ना की सीमा को 3500 रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 7000 रूपए  सक्षम सरकार दवारा

अनुसूचित रोजगार के लिए न्यूनतम मजदूरी अधिक हो , जो की व्यवस्था  की गयी है | बोनस का भुगतान अधिनियम ,

1965 में संशोधन वर्ष 2014 से प्रभावी है |                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          

 

व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य  

भारतीय सविधान द्वारा प्रदत्त श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थय संबंधी प्रावधानों को खान सुरक्षा महानिदेशलया ( डीजीएमएस ) और कारखाना सुरक्षा सेवा एवं श्रम संस्थान

महानिदेशालय ( DGAFAASLI) के माध्यम  से लागू  किया जा रहा हैं | डीजीएमएस खान सुरक्षा अधिनियम , 1952 के अंतर्गत नियुक्त

अपने निरीक्षकों के माध्यम से खनन उद्योग में सुरक्षाऔर स्वास्थ्य के प्रावधानों को लागू करवाते हैं | DGFAASLI   अपने डाक   सुरक्षा

निरीक्षणालय के माध्यम से बंदरगाहों और पोतों में सुरक्षा प्रावधान लागु करवाते हैं और इसके साथ  ही वे

राष्ट्रीय स्तर  पर विभिन्न राज्य सरकारों के कारखाना निरिक्षणालयों के लिए समन्वयन एजेंसी के रूप में भी

कार्य करते हैं |

 

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