पंचायती राज क्या हैं 
पंचायती राज मंत्रालय की स्थापना 2004 में की गई थी | इसका इसका प्रमुख कार्य संविधान के भाग – 9 के प्रावधानों , अनुच्छेद 243 जेडडी और पीएस के अनुसार जिला योजना समिति संबंधी प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना हैं | मंत्रालय का लक्स्य पचायतों अथवा पंचायती राज संस्थाओं के माधयम से विकेन्द्रीयकृत और भागीदारीपूर्ण स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था कारण हैं | मंत्रालय का मिशन पंचायत राज संस्थाओं का सशक्तिकरण , उन्हें सक्षम एवं जवाबदेह बनाना हैं ताकि सामाजिक न्याय और सक्षम सेवा वितरण के साथ समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके | मंत्रालय अपने लक्ष्य हाशिल करने के लिए विभिन्न तरीकों से काम करता हैं| पंचायती राज मंत्रालय राज ज्ञान के सर्जन और उसे साझा करने पर बल देता हैं ताकि समाधान किये जाने वाले मुद्दे स्पस्ट हों , उनके लिए सार्थक सरयनीतियाँ तैयार की जाये और सरकार के भीतर और गैर – सरकारी एजेंसियों तथा विषेशज्ञों के बीच भागीदारी हो | मंत्रालय विभन्न विभिन्न राज्यों में सिखने के लिए मंत्र लय ने अपने विदेश में बुनियादी परिवर्तन करते हुए अपने को नए ढंग से तैयार किया हैं |
वेबसाइड : www.panchayat . gon.in
संवैधानिक लक्ष्य 
भारत के संविघान के भाग -9 में त्रि – स्तरीय पंचायतों की स्थापना (20 लाख से काम आबादी वाले राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में केवल दो स्थरी ) का पप्रावधान हैं | : (1) ग्रामीण साथ पर ग्राम पंचायतें ;( 2 ) जिला स्टार परे जला पंचायें ; और ;( 3 ) ग्राम पंचायतें एवं जिला पंचायतें के बिच उप – जिला स्तर पर मध्यमवर्ती पंचायतें | इसमें ग्राम सभा ( ग्राम पांच्यातें के क्षेत्र में रहने वाले पंजीकृत मतदाताओं की आम सभा ) का भी प्रावधान्न हैं , जो ग्रामवाशियोंke स्थानीय शासन में सीधे भागीदारी के लिए एक मंच हैं | भारत के संविधान में पंचायतों के लिए पंचा वर्ष का कार्यकाल निर्धारित किया हैं और इनमें महिलाओं एवं भारतीय समाज के हाशिये पर रहने वाले वर्गों ( अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों ) के लिए सीटों आरक्षण का प्रावधान किया जाता हैं | अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण उनकी उनकी आबादी के अनुपात में प्रदान किया जाता है, जबकि महिकलाओं के लिए सीटों और मुखिया के पदों में आरक्षण 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया हैं | हालाँकि, अनेक राज्यों ने पंचायतों में महिलाओं के लिए सभी सदस्यों के प्रत्यक्ष चुनाव की भी व्यवस्था की गई हैं | इन चुनावों के संचालन के लिए सभी राज्यों कोआकराज्यनिर्वाचनायोग के गठन का अधिदेश दिया गया हैं | राज्यों के लिए यहभी अनिवार्य हैं की वे हर पंचवार बाद राज्य वित्त आयोग( एसफसी) का गांठ करें , जो राज्यों और स्थानीय सरकारों( सहरी और ग्रामीण दोनों) के भी पंचायतों के बीच वित्तीय संशाधनों क्व बटवारे के सिद्धांतों की अनुशंसा करे | राज्य वित्ति आयोग राज्य सरकार और पंचयों जे बीच करों , शिल्कों , टोल और प्रशुल्कों आदि की निवल प्राप्तियों के वितरण के बारे में राजपाल को अपनी सिपरिशें देगें | वे पंचायतों को सौपें गए या इनके द्वारा अधिग्रहित करों , प्रशुल्कों टोल और फिस्तथा राज्यों की समेकित निधि से पंचयतों को दिए जाने वाले सहायता अनुदान का निर्धारण करेगें और पंचायतों की वित्तीय स्थिति में सुधार लेन के उपाय सुझाएगें |
उपयुक्त व्यापक फ्रेमवर्क के भतार , चुकी स्थानीय सरकार राज्य का विषय हैं , अतः अपने – अपने राज्यों में पंचाटें राज के विभन्न पहलुओं के निर्धारण में राज्य विधानमंडलों की महत्वपुर्ण भूमिका हैं | जहाँ में पंचयतों के अधिकारों के हस्तारंतरण का प्रश्न हैं , राज्य उसकी कुंजी हैं | संविधान में प्रावधान किया गया हैं की पंचायतें स्थानीय शासनिया शासन के स्थानों के रूप में काम करेगीं और आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की योजना बनाएंगी तथा उन्हें लागु करेगीं , परन्तु पांच्यारों की शक्तियाँ और प्राधिकार हस्तान्तरिक करने का कार्य राज्यों पर छोड़ दिया गया |
राजीव गाँधी पंचायत सशक्ती
करण अभियान
पंचायती राज की संस्थानों कार्यप्रणाली में सुधर लेन के लिए पंचायती मंत्रालय ने 12 वी पंचवर्षीय योजनावधि यानी 2012 – 12 से 2015 -16 तक राजीव गाँधी पंचायत sashaktikaran अभियान ( आरजी ऐसा ए) चलाया | इस अभियान के दौरान पंचायतों के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाओं जैसे अधिकारों का अपर्याप्त हस्तांतरण , कार्मिकों का आभाव , बुनियादी ढांचे का आभाव और पंचायतों की करहर कार्यप्रणाली में सिमित क्षमता जा अध्ययन किया गया और उन्हें दूर करने के लिए कार्मिक , ढांचा , प्रशिक्षण और पंचयतों को अधिकारों के हस्तांतरण को बढ़ावा देने तथा जवाबदेही का ढांचा कायम करने के उपाय किये गए |
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGASA) के अंतर्गत पंचायती राज संस्थानों में क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा ताकि बुनियादी सेवाएं वितरित करने के लिए समाभिरूप कार्रवाई की जा सके और विकास के लक्ष्य हाशिल किये जा सकें राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचयत विकास योजना( जीपीडीपी) के पहलुओं पर विशेष जोर देते हुए सभी संबद्धया पक्षों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सुविधाएँ जुटाने और उनके संवर्धन के व्यापक प्रयास किये जायेंगें |
ई- पंचायत
ई – पंचायत , 2006 में तैयार की गई राष्ट्रीय ई – गवर्नेस योजना ( ANIGP ) के अंतर्गत तय की गई 27 मिशन मिड परियोजनाओं में से एक हैं |
14 वे वित्त आयोग ( अफफस ) की सिफारिशों के अनुसार संविधान जे भाग – 9 जे अंतर्गत देश में गठित ग्राम पंचायतों को 2,00,29.20 करोड़ रुपये का अनुदान 2015-20 की अवधि के लिए हस्तांतरित किया गया | इसका अर्थ हैं राज्यों के लिए प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 488 रुपये की सहायता प्रदान की गयी , ताकि नियमित अंतराल पर इन संस्थानों के लिए संशाधनों में वृद्धि होगी और वे सौपें गएँ सांविधिक कार्यों के निवर्हन के लिए संसाधनों में वृद्धि कर सकेगें | 14 वे वित्त आयोग ने मेघालय , मिजोरम , त्रिपुरा और असम , मणिपुर के पर्वतीय जिलों , नागालैंड एवं मिजोरम के ग्रामीण क्षेत्रों में छथि अनुसूची जे अंतर्गत भाग – 9 से इतर पंचयती राज संस्थाओं के लिए अनुदान की अनुशंसा नहीं की हैं |
पेयजल और svachhta
पेयजल आपूर्ति विभाग की स्थापना 1999 में ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत की आयी थी , जिसे बाद में 2010 में पेयजल और स्वच्छता विभाग का नाम दिया गया | ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छ्ता के महत्त्व को देखते हुए भारत सरकार ने 2011 में पेयजल और स्वच्छ्ता मंत्रालय के रूप में एक पृथक मंत्रालय अधिसूचित किया | जून , 2019 में आज अधिसूचना के बाद मंत्रालय का नाम बदलकर पेयजल एवं स्वच्छ्ता विभाग , जल शक्ति मंत्रालय किया गया | जल शक्ति मंत्रालय एक नोडल मंत्रालय हैं , जो भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों जैसे ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम ( ANARDDBLYP) और देश में स्वस्छता के लिए स्वस्छ भारत मिशन ( ग्रामीण ) के समग्र नीति , योजना , वित्त पोषण और समन्वय केलिए जिम्मेदार हैं | 
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