नमस्कार दोस्तों ,कैसे है आप ?,
क्या होता है ग्रामीण विकास प्रमुख कार्यक्रम
आज बात करते है ग्रामीण विकास प्रमुख कार्यक्रम की जिसके बारे में जानना बहुत जरुरी है |

ग्रामीण विकास मंत्रालय विकाश द्वारा चलाये जा रहें प्रमुख कार्य क्रम इस प्रकार हैं : दिहाड़ी आधार पर रोजगार देने के लिए महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी अधिनियम ( एन जीएमआईजीए ) ; स्वरोजगार एवं कौशल विकाश के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविला मिशन ( एनआरलम ) ; बीपीएल परिवार को आवास ( घर ) उपलब्ध करने हेतु सभी के लिए आवास – प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण ( पिमजीएसवाई – जी ) ; उत्तम गुणवत्ता वाली सड़कों के निर्माण हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ( पीएमजीएसवाई) ; सामाजिक पेंशन हरतु राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम ( एनएसपी ) ; श्यामा प्रसाद मुखर्जी रर्बन ( आरआरबी एन ) मिशन ; भूमि की उत्पादकता बढ़ाते हेयू समेकित जल – संभार प्रबंधन कार्यक्रम ( आईडब्लूएमपी ) |
ग्रामीण रोजगार
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम ( मनरेगा ) अपनी शुरुआत के बाद से कई बदलावों से गुजरा हैं और करोड़ों कोगों की जीवनरेखा बन गया हैं | इस अधिनियम का लक्ष्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा में वृद्धि करना हैं | इसमें किसी भी वित्तीय अर्श के दौरान प्रत्येक परिवार की न्यूनतम 100 दिन के लिए दिहाड़ी रोजगार पक्के तौर पर उपलब्ध कराया जाता हैं , बशर्तें उसके वयस्क सदस्य अकुशल श्रम कार्य करने के इच्छुक हैं |
महात्मा गाँधी नरेगा कार्यक्रम के प्रमुख स्तंभों में सामाजिक समावेशन , लिंग समानता , सामाजिक सुरक्षा और समानता पर आधारित विकास शामिल हैं| इस कार्य के लक्ष्य इस प्रकार हैं : ग्रामीण क्षेत्र में प्रत्येक परिवार को मांग के आर्डर पर किसी भी वित्तीय वर्ष में 100 दिन के लिए अकुशल श्रम कार्य के रूप में दिहाड़ी रोजगार उपलब्ध कराना, संबद्ध क्षेत्रों के ढांचागत आधार का विकास करने वाले कार्यों में दिहाड़ी रोजगार सृजित करते एवं सुरक्षित बनाना : महिलाओं का सशक्तिकरण सुनिश्चित करना ; ग्रामीण निशानों का सक्रिय सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करना और उन्हें एक सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना तथा निचले स्तर के लोकतान्त्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करना |
सरकार अन्य उपायों के जरिए इस कार्क्रम में सकारात्मक परिवर्तन लेन देन की दिशा में काम कर रहे हैं | महात्मा गाँधी नरेगा अधिनियम , 2005 के समग्र फ्रेमवर्क के अंदर मनरेगा के समग्र कार्यान्वयन को सुदृढ़ बनाने के लये अनेक कदम उठाये गए हैं | अधिनियम के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अधिक बजट आवंटन सुनिश्चित करने के आलावा कार्यकम कार्यान्वयन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लेन के लिए इलेक्ट्रानिक धन प्रबंधन प्रणाली ( ई एफमस) , आधार संबद्धता , साजित संपत्तियों की जियो – टैगिंग और सामाजिक लेखा परिक्षण प्रणाली का सदृढीकरण आदि जैसे उपाय किया गया हैं |
प्रत्यक्ष्य लाभ अंतरण
धन प्रवाह व्यवस्था को सुचारु रूप प्रदान करने और दिहाड़ी के भुगतान में विलम्बा दूर करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक धन प्रबंधन प्रणाली ( एन ई एफमस ) लागु की हैं | इस प्रक्रिया को राज्यों की दिहादिन के भुगतान के लिए दान के आवंटन में विलम्ब में कमी आती हैं और विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में स्वरोजगार उधमियों के प्रस्तावों को व्यवहार् और प्रदान किया जा सके | वर्तमान में देश में 583 आरसीटीआई काम कर रहें हैं |
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
गरीब में कमी लेन हरतु कार्यनीति के हिस्शे के रूप में सरकार ने वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ( पीएमजीएसवाई ) शुरू की थी |
केंद्र प्रायोजित इस योजना का लक्ष्य ग्रामीण सड़कें बनाने के काम में राज्यों की मदद करना था , हालाकिं ग्रामीण सड़कें संविधान में राज्य सोची का विषय हैं | इस कार्यक्रम का प्राथमिक लक्ष्य कोर – नेटवर्क के अनुरूप अभी तक सड़क से न जुड़ा पाई पत्र बस्तियों को हर मौसम में काम करने वाली सड़कों ( आवश्यक पुलियों और नालियों सहित , जो पुरे साल काम करती हों ) के साथ जोड़ना हैं | मैदानी क्षेत्रों में 500 या उससे अधिक आबादी ( 2001 की जनगणना के अनुसार ) वाली बस्तियों को पत्र समझा गया हैं | इसी प्रकार ‘ विशेष श्रेणी वाली राज्यों ‘ ( पूर्वोत्तर , सिक्किम , हिमाचल प्रदेश , जम्मू और कश्मीर ( वर्तमान में केंद्र शासित प्रदेश ) तथा उत्तराखंड ), रेगिस्तानी क्षेत्रों , जनजातीय ( अनुसूचित 5) क्षेत्रों और 88 चुने जन जातिया और पिछड़ें जिलों के मामलों में कोर – नेटवर्क के अनुसार अभी तक सड़क से न जुड़ा पाई 250 या उससे अधिक आबादी ( 2001 की जनगणना के अनुसार ) वाली पत्र बस्तियों को जोड़ने का लक्ष्य हैं |
वांछित गुणवत्ता मानकों के साथ कार्यक्रम के निष्पादन के लिए त्रि – स्तरीय गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था संस्थाबद्ध रूप में की गई हैं | इस व्यवस्था को प्रथम स्थान कार्यक्रम कार्यान्वयन यूनिट ( पिआइतु ) स्टार पर विभागीय गुणवत्ता नियंत्रण से संबद्ध हैं | इस स्टार का लक्ष्य फील्ड प्रयोगशाला स्टार पर अनिवार्य निरीक्षकों और वर्कमैनशिप के जरिये प्रक्रिया नियंत्रण करना हैं | दूसरे स्टाप में की गई हैं , जिसमें बीचोबीच सड़क कार्यों का निरक्षण करते हैं और न केवल गुणवत्ता की चर्चा करते हैं , बल्कि फील्ड में काम करने वाले कार्यकर्ताओं का वरिस्ट के माध्यम से मार्गदर्शन भी करते हैं |
ग्रामीण आवास
आवास को सर्वत्र बुनियादी आवश्यकता के रूप में स्वीकार किया गया हैं |
ग्रामीण क्षेत्रों में , विशेष रूप से निर्धनों के लिए आवास की कमी दूर करना और अवश्य की गुणवत्ता में सुधार लाना सरकार की गरीबी उन्मूलन कार्य नीति का एक महत्वपूर्ण घटक हैं | ग्रामीण आवास योजना , इंदिरा आवास योजना ( आईएवाई ) का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की रेखा ( बीपीएल ) से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को मकान उपलब्ध करने के उद्देश्य से किया गया | इस कार्यक्रम के प्रारम्भ होने से तीन करोड़ सात लाख मकानों के निर्माण के लिए सहायता प्रदान की जा चुकी हैं
2022 तक ‘ सबके लिए आवास ‘ की सरकार की प्राथमिकता के सन्दर्भ में ग्रामीण आवास योजना – आईएवाई लो प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण ( पीएमएवाई – जी ) के रूप में पुनरगठित किया गया हैं | यह कार्यक्रम वित्तीय वर्ष 2016 -17 में लागू हुआ | इस कार्यक्रम
की प्रमुख विशेषता इस प्रकार हैं ; ( क ) 2016 – 17 से 2018-19 के दौरान तीन वर्ष की अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ मकानों के निर्माण के लिए सहायता प्रदान करना ; ( ख) ; मैदानी इलाकों में प्रति मानकर दी जाने वाली सहायत 70,000 रुपये से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये की गई और राज्यों , कठिन क्षेतों और आईएपी जिलों में यहाँ सहायता 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.30 लखा रुपये की गई ; ( ग ) सामाजिक – आर्थिक और जाती गणना ( एस ई सीसी 2011) से सम्बंधित परिवारों के आकड़ों के आधार पर लाभार्थियों का चयन , जिसके अनुसार स्वतः ; बहिष्करण कालोनी में आने वाले दो कमरे या उससे कम मकानों में रहने वाले परिवार पात्र समझे जाते हैं ; ( घ ) कार्यान्वयन एजेंसियों और लाभार्थियों और मकानों के निर्माण में तकनीक सहायता प्रदान करने और परियोजना के अंतर्गत लक्ष्य हासिल करने में मदद करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय तकनीक सहायता एजेंसी की स्थान की गई है |
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम
भारत के संविधान के अनुच्छेद 41 राज्य को निर्देश दिया गया हैं की वह बेरोजगार , वृद्ध , बीमार और अक्षम होने की स्थिति में और अवांछित आभाव के अन्य मामलों में अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमाओं के अनुसार नागरिकों को सरकारी सहायता प्रदान करेगा | भारत के संविधान में वर्णित राज्य के निति – निर्देशक सिद्धांतों में राज्य पर यह दायित्व डाला गया हैं की वह अपने साधनों के भीतर कल्याण के अनेक उपाय संचालित करे |
इन्हें नेक सिद्धांत के अनुसार भारत सरकार ने 1995 में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम ( एन एसपी ) प्रारंभ किया | यह एक केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम हैं , जिसके अंतर्गत राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदंड , दिशानिर्देशों और शतों के अनुरूप लाभार्थियों को लाभ पहुंचने के लिए सत– प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती हैं | एन एसएसपी एक सामाजिक सहायता कार्यक्रम हैं , जिसके अंतर्गत परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु हो जाने के मामले में वृद्धों , विधवाओं , दिव्यांगजनों को सामाजिक सहायता प्रदान की जाती हैं | इसका उद्देश्य राज्यों द्वारा प्रदान किये जा रहे अथवा भविष्य में प्रदान किये जाने वाले लाभों के अतिरिक्त सहायता देना हैं , ताकि न्यूनतम राष्ट्रीय मानक के अनुरूप सहायता प्रदान करने के पीछे लक्ष्य यहाँ हैं की समूचे देश लाभार्थियों को सामाजिक संरक्षित प्रदान किया जा सके | इस सहायता में और सहायता जोड़ने अथवा कवरेज का विस्तार करने के लिए राज्य स्वतन्त्र हैं |
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