कोर बैंकिंग
नमस्कार दोस्तों ,कैसे है आप ?,
जैसा की आप लोग उपरोक्त विषय से समझ गए होंगे की हम आज किस विषय पर आपको जानकारी प्रदान करंगे |
आखिर क्या होता है कोर बैंकिंग -:
कोर बैंकिगं समाधान ( सीबीएस ) भारतीय डाक के सूचना प्रौद्योगिकीय आधुनिकरण का हिस्सा हैं |
इसके उदेस्य डाकघरों में आवश्यक सूचना प्रौद्योगिकीय अवसंरचन के साथ विभिन्न सूचना प्रौधोगिकीय समाधानों को लाना हैं | परियोजना का उद्देश्य चालू योजना अवधि के दौरान लघु बचत योजनाओं के लिये सभी विभागीय डाकघरों में कोर बैंकिंग समाधानों को लागु करना हैं |
परियोजना से ‘ कही भी , कभी भी ‘ बैंकिग , एटीएम तथा इंटरनेट बैंकिगं सुविधा मिला सकेगी |
सुकन्या समृद्धि योजना
कन्या शिशु के सुरक्षा भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना नामक नई लघु बचत योजना शुरुआत 2015 में की गयी थी |
योजना अंतर्गत कन्या योजना शिशु के नाम पर उसके क़ानूनी / नैसर्गिक अभिभावक एक खाता खुलवा सकते हैं |
इस योजना के अधीन वह दो कन्याओं के नाम पर उनके जन्म से 10 वर्ष तक की आयु तक दो अलग अलग कहते भी खुल सकते हैं |
भारतीय पोस्ट पैमेंट्स बैंक
भारतीय पोस्ट पेमेंट्स बैंक ( आईपीपीबी ) स्थापना सामान्य जान के लिए सबसे सुगम , वहनीय और भरोसेमंद बैंक के तौर पर 2016 में की गयी थी |
इसक लक्ष्य प्रमुख रूप से नगर आधारित अर्थव्यवस्था में कैशलेश लेन- देन कीस्थापना और बैंकिगं सायरे से बहार के लोगों को इसके अधीन लाना है |
आईपीपीबी को डाक विभाग के अंतर्गत 100 प्रतिशत सार्वजनिक क्षेत्र कंपनी जे तौर पर शामिल किया गया हैं | देश भर में आईपीपीबी की 650 शाखाये स्थापित की है|
जो जिला प्रधान डाकघरों से जुडी हैं | जिलों के सभी डाकघरों को भी उनकी IPPB शाखा से जोड़ा गया हैं | इसके अनुसार, सबसे बड़ा बैंक बना गया है जिसके अधीन 3 लखा अधिगम प्रतीक्षित और पंजीकृत डाककर्मी हुए हरमिन सक सेवक ( जीडीएस ) घरों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाते हैं |
आईपीपबि अनेक सुविधाएं प्रदान करता हैं जिसमें प्रमुख हैं – (1) बचत जमा – बचत खता , चालू खाता ; (2) राशि हस्तातरंतर ( 3) प्रत्यक्ष लाभ हस्तारान्तरण – मनरेगा, छत्रवृतिय , समाज कल्याण कभा और अन्य सरकारी छूट; (4) थर्ड पार्टी प्रोडक्ट – ऋण , बिमा , निवेश , da बचत योजनाए ;(5) बिल और अन्य भुगतान – मोबाईल एवं डीटीएच रिचार , बिजली / पानी – गैस बिल , अनुदान तथा बिमाशूलज और (6) उधम व्यापारिक भुगतान – डाक उत्पाद , ई- कर्म डिलीवरी का डिजिटल भुगतान , छोटे व्यापारिक / किराना / स्टोर असंगठित रिटेल ऑफ़लाइन पेमेंट , नगद प्रबंधन सेवाएं| डाकघर बचत बैंकिंग ( पिआवासबी) का प्रमुख लक्ष बचत होता हैं जबकि मुख्यत: डिजिटल भुगतान और प्राप्ति का मार्ग अपनाने पर जोर देता हैं \ पिआवासबी की बचत खाता, सावधि संचार और सूचना प्रोधोगिकी जमा , मासिक आय योजना , पीपीएफ , अससाईaadhi बचत योजनाए हैं , जबकि आईपीपीबी बचत खाता एवं चालू खाता ( सीआसा) , प्रश्न एवं बिल भगतन सेवाएं , व्यापारिक सेवाएं और थर्ड पार्टी उत्पाद जैसी सेवाएं प्रदान करता हैं | आईपीपबि के आरंभ के साथ ही , डाक घर बचत खाता( पिआवासबी ) को एक आईपीपीबी से जोड़ा जा सकता हैं , जिसके जरिये एक anta: प्रचलनिया बैंकिंग , इकोसिस्टम के माध्यमसे पीयूएसए खतों को सचालित किया जा सकता हैं जिससे वह आईएमपीएस , यूपीआई , आइएफटी और आरटीजीएस तथा बीबीपीएस जैसे अन्य ऑनलाइन भुगतान पैमेंट्स करने योग्य भी बनाते है | इसी तहत , किसी दिन एक लाख रूपये से अधिक की शेष राशि वाले पिअवासा कहते आईपीपीबी खतों की स्वपि – आउट लक्ष्यmen भी सहायक साबित होते हैं | आईपीपीबी सिजिटल भुगतान के माधयम से डाक विभाग को ई – कामर्स व्यवसाय सेवाएं भी प्रदान करता हैं | डाक विभाग – आईपीपीबी प्रणाली एकीकरण के माध्यम से पिआवासबी के करोड़ों खतों को जोड़ा जायेगा जो फिलहाल अन्तः प्रचलनीय बैंकिंग इकोसिस्टम के जरिये एक सिमित लूप सिस्टम में काम कर रहें हैं | इसके माध्यम से इन खातों को मोबाईल बैंकिंग, इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफार्म , ऑनलाइन बिल पेमेंट डिजिटल भुगतान आदि की चौबीस घंटे चलने अली सुविधाएं चल सकेगीं | आईपीपीबी का मुख्या लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों के लाभारतीयों , प्रवाशी मजदूरों , असंगठित क्षेत्र के कार्मिकों , छोटे और मझोले उधमों , पंचायतों , अलप – आय परिवारों तथा ग्रामीणों एवं सहरी क्षेत्रों के बैंकिंग रहित और न्यून बैंकिंग क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचना हैं |
ग्रामीण व्यवसाय
डाक विभाग ला मुख्य नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में हैं | देश 1,56,721 डाकघरों में से 1,41,018 डाकघर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं | कुछ वर्षों डाक विभाग ( डीओपी) के वित्तीय समावेशन ग्रामीण बैंकिंग ( आरबी ) डिवीजन को दूरदराज के ग्रामीण स्केटरों में रहने वाले लोगों को डाकघर की वित्तीय और डाक योजनाओं के दायरे में लेन का आदेश जारी किया हैं ताकि लोग इन सेवाओं का लाभ उठा सकें |
डाक जीवन बीमा
डाक जीवन बिमा योजना ( पीएलआई ) का आरंभ 1 फरवरी 88 को डाक विभाग के कर्मचारियों के लिए एक कल्याण करि योजना के तौर प् हुआ था और 1888 में इनके अंतर्जा टेलीग्राम ब्विभाग के कर्मचारियों को बह लाया गया था | इसके अंतर्गत , केन्द्द्रीय और राज्य सरकारों के कर्मचारी , केंद्रीय और राज्य सरकारों के प्रतिष्ठान , विश्वविद्यालय , सरकारी सहायत से चलने वाली शैक्षिक संस्था , राष्ट्रीयकृत बैंक एवं स्थानीय निकाय आदि आते हैं | पीएलआई बिमा सुविभा के अंतरगत रक्षा सेवाओं तथा आर्द्र – सुरक्षा बालो को भी लाया गया हैं | केंद्र / राज्य सरकारों के

सरकारी / सार्वजनिक क्षेत्र / बैंको में न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्शा रखने वाले अनुसूचियत कमर्शियल बैंकों , क्रडिट को – आपरेटिव सोसाइटियों , सयुक्त उद्यमों के कर्चारियों को भी जवान बिमा के दायरे में लाया गया हौं परिषद् / भारतीय मेडिकल कौण्डिल के अंतर्गत आने वाली विश्वविद्यालय / शैक्षिक संसथान भी इसके अंतरगत आते हैं | पीएलए को सुविधा अब डाक्टरों , इंजीनयरों , प्रबंधक सलाहकारों , चार्टड अकाउंटेंट्स , आर्किटेस्ट्स , वकीलों , बैंकों आधी को और एनसी ( नेशलन स्टार्क एक्स्चेस ) और बीएसई ( बॉम्बे स्टार्च एक्सचेंज ) में सोचबाध्द कंपनियों को भी उपलब्ध हैं |
4,000 रुपये की उचित बिमा सिमा से shuru कर , इसा योजना के अंतरगत 50 लाख रुपये का अधिनियम बीमा किया जा चूका हैं | 31 मार्च ,2020 तक 64.50 लाख पलिश्तियों के अंतर्गत ,88,078,89 करों रुपये का बीमा किया जा चूका हैं | वर्ष 209- 20 के लिए डाक जवान बीमा शुल्क 8,090,68 करों रुपये रहा हैं | एकल बीमा पॉलिसियों के अतिरिक्त , पीएलए आई , डाक कविभाग के ग्रामीण डाक सेवकों के लिए सामूहिक बीमा योजना भी चलती हैं |
ग्रामीण डाक जीवन बीमा
ग्रामीण डाक बिमा योजना ( आरपीएलआई ) की शुरुआत 1995 में बिमा क्षेत्र में सुधार के लये आधिकारिक समिति की शिफरिशों के आधार पर की गई थिए | इस योजना का मुख ध्येय ग्रामीण जान और विशेष्जकर गॉंवों के कमजोर वर्ग व महिलाकर्मोयों को बिमा उपलब्ध करना हैं और साथ ही ग्रामीण आमजन के बीच बिमा के प्रति जागरूकता फैलाना भी हैं |
बिमा क्षेत्र के उदार बनाने के साथ ही डाक जीवन बिमा और ग्रामीण सक बिमा योजना को बाजार स्पर्धा का सामना करना पद रहा हैं | पीएलए और आरपीएलआई बिमा योजनायें अन्य बिमा कंपनियों की तुलना काम लगत पर बिमा कवचा उपलब्ध कराती हैं | इसलिए पत्रं ग्राहकों में पीएलए और आरपीएलआई बहुत लोकप्रियं हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं | 31 मार्च ,2020 तक आरपीएलआई की 250.61 lakha पालिशियन अस्तित्व में आ चुकी है जिनके जरिये 1,35,540.13 करों रुपये की राशि बीमाकृत हो चुकी हैं |
डाक जीवन बीमा के प्लान
- सम्पूर्ण हवन सुरक्षा ( सुरक्षा ) , २। परिवर्तनीय सनौरं जीवन सुरक्षा ( सुविभा ) , ३। एंडोमेंट सुरक्षा ( संतोष ), ४। अनुमानिया एंडोमेंट सुरक्षा ( सुमगल ) , ५। सयुक्त बीमा सुरक्षा ( युगल सुरक्षा ) , ६। बाल पालिया ( बाल जीवन बीमा )
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद यहाँ तक आपने हमारे ब्लॉग को पढ़ा अगर आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेंट बॉक्स
मे जरुर बताये तथा अपने मित्रों को शेयर जरुर करे |
धन्यवाद्
