CDR क्या है,जिसके द्वारा पुलिस जान जाती है, कि आपने किससे कब और कितनी देर बात-चीत की -:

नमस्कार दोस्तों ,कैसे है आप ?,
जैसा की आप लोग उपरोक्त विषय से समझ गए होंगे की हम आज किस विषय पर आपको जानकारी प्रदान करंगे – :
सीडीआर CDR आखिर है क्या -:
| – CDR सीडीआर यानि कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड –
यह एक टेलीकॉम कंपनियों द्वारा जनरेट किया गया एक डेटा लॉग होता है, जो की ग्राहक द्वारा की गयी कॉल, एसऍमएस और डेटा उपयोग की समस्त जानकारी को सुरछित रखता है जैसे की – किसी व्यक्ति की सीडीआर से पता चलता है की उसने कितने कॉल किये , कितने कॉल रिसीव किये , किन नम्बरों पर कॉल किया, किन नम्बरों से कॉल रिसीव हुआ , कॉल की डेट , टाइम मतलब की उसकी कितने समय तक किससे कितनी देर बात हुई और किन नम्बरो पर मेसेज भेजे गए, किन नंबरो से मैसेज रिसीव हुए अर्थार्त पूरी जानकारी प्राप्त हो जाती है | |
क्या हर कोई सीडीआर CDR प्राप्त कर सकता है ?
| जी नहीं, क़ानूनी तौर पर तो बिलकुल नहीं , सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट , इंटेलिजेंस ब्यूरो, पुलिस, NIA , ATS , NCB और जितनी भी जाँच एजेन्सिया है, इनको किसी मामले की जाँच के दौरान सीडीआर की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है । लकिन इसके लिए भी उनको उच्च अधिकारियो से अनुमति लेनी पड़ती है | |
पुलिस या जाँच एजेंसियो को सीडीआर कब और कितने समय में मिल जाती है ?
| यदि कोई गंभीर अपराध हुआ हो, किसी की हत्या हुई हो , या फिर रेप का मामला हो और आरोपी फरार हो, उसे तुरंत गिरफ्तार करने की आवश्कता हो, तो मेल मिलने के बाद मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनियां आधे घंटे में सीडीआर उपलब्ध करा देती है, और जो सामन्य केस होता है उसमे 2-3 हफ्ते तक वक्त लग सकता है |
वैसे मोबाइल कम्पनिया एक साल तक का सीडीआर उपलब्ध करा देती है | यदि गंभीर मामलो में एक साल से भी अधिक की सीडीआर की आवश्कयता होती है तो उच्च अधिकारिओ से परमिसन लेनी होती है , यह इतना आसान नहीं होता है | |

क्या पुलिस को कॉल डिटेल्स से बिलकुल सटीक लोकेशन प्राप्त हो जाती है ?
| जी हाँ पुलिस को कॉल डिटेल्स से बिलकुल सटीक लोकेशन प्राप्त हो जाती है, आपको पता ही होगा की एक मोबाइल टावर होता है, जैसा की आप लोगो ने लोगो के मुँह से सुना ही होगा जब उनकी बात करते- करते उनकी कॉल कट हो जाती है तो वो यही कहते है की लगता है की टावर चला गया या नेटवर्क चले गए है |
आमतौर पर किसी व्यक्ति के मोबाइल की लोकेशन टावर से पता लगाई जाती है | सीडीआर में मोबाइल नेटवर्क सर्विस देने वाली कप्म्पनिया टावर के नंबर का जिक्र करती है, कॉल करते समय जिस टावर से उसे नेटवर्क मिल रहा होता है, उस टावर नंबर से लोकेशन का पता चलता है | एक मोबाइल टावर आमतौर पर 500 मीटर के रेडियस को कवर करता है, जीपीएस एप के जरिये उस 500 मीटर के दायरे में पुलिस कॉल करने वाले व्यक्ति का बिलकुल सटीक लोकेशन पता लगा लेती है | |
सीडीआर से सम्बंधित कुछ तकनीकी जानकारी -:
| सीडीआर से सम्बंधित कुछ तकनीकी जानकारी इस प्रकार है की जैसे की –
सीडीआर का मतलब होता है, की यह एक स्ट्रक्चर्ड डेटा होता है, जो आमतौर पर csv या json प्रारूप में होता है जैसे की -:
तकनीकी कार्यप्रणालियां -: जब भी कोई यूजर कॉल करता है, तो मोबाइल स्विचिंग सेण्टर (MSC) उस सत्र का डेटा रिकॉर्ड करता है, यह डेटा मोबाइल सर्विस प्रदाता के सिस्टम में जमा हो जाता है | मोबाइल स्विचिंग सेण्टर (MSC) – यह एक जनरेट की गयी डेटा फाइल होती है, जिसमे कॉल करने वाले या अन्य समस्त जानकारी दर्ज होती है | बिलिंग और धोखा- धड़ी का पता लगाने के लिये ये रिकॉर्ड बेहद जरुरी होता है |
यह 3GPP मानकों जैसे की (ASS.1/BER) का पालन करते है| एमएससी इन रिकॉर्ड को अक्सर बाइनरी फॉर्मेट जैसे की (UCBILL) में जनरेट करते है, जिनको मीडिएशन सिस्टम में ट्रांसफर किया जाता है | |
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